BHRAMAR KA JHAROKHA DARD E DIL WELCOMES YOU

Showing posts with label dahej. Show all posts
Showing posts with label dahej. Show all posts

Wednesday, 27 July 2011

सूखी कड़ाही में जलती पूड़ी

सावन का महीना
हरियाली – कजरी
कारे बदरा उमड़ -घुमड़ डराए
images.jpg-black cloud
खुरपी -पलरी लिए घास की
अम्मा दौड़ी आई द्वारे
दामाद -बेटी के अचानक
घर आने की खबर सुन
थी सकपकाई
आस पास दौड़
सुब कुछ जुटाई
चूल्हे के पास धुएं में
बैठ बिटिया अम्मा संग
आंसू पोंछ -पोंछ
जी भर के बतियाई
पूड़ी कढ़ी
दामाद आया
कोहनी से मार- रूपा को
“उसने” -खूब उकसाया
“कुछ” कहने को
हलक में अटके शब्द
रूपा को गूंगा बनाये
फिर बिदाई
एक बंधन में बंधी गाय
चले जैसे संग -
किसी कसाई
गले लिपटी रोये
आंसू से ज्यों सारी यादें
धोती लगे – नीर इतना -
ज्यों बाढ़ सब कुछ
बहा ले जाए
अम्मा की मैली पुरानी साड़ी
सूखी कड़ाही में जलती पूड़ी
ज्यों सूखे सर में फंसा कमल
छटपटाना
घर का गिरता -छज्जा -कोना
देखती –चली —गयी ……
और कल सुबह
खबर आ पहुंची
स्टोव फट गया
images.jpg-flame
अरी ! बुधिया करमजली
रूपा ..तेरी बिटिया
तो जल गयी ………
burning-fire-flames-woman

(सभी फोटो साभार गूगल /नेट से लिया गया )
———————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर”५
जल पी बी २७.०७.२०११ ५.४५ पूर्वाह्न

Rate this Article:



DE AISA AASHISH MUJHE MAA AANKHON KA TARA BAN JAOON